मिच्छामि दुक्कडम बीते हुए जीवन काल में स्वार्थ या प्रमाद के वश हो कर जाने या अनजाने मे मेरे किसी कृत्य से आप का दिल दुखा हो तो संवत्सरी के इस पावन अवसर पर जैसे ब्रह्मांड के सभी जीवों से क्षमा मांगी है उसी तरह आप सभी से आंतकरण पूर्वक क्षमा चाहता हूँ .